Monday, 11 September 2017

फिर भी कविता गाऊँगा ...

चाहे मुझपर व्यंग्य करो या चाहे तंग करो मुझको
चाहे कहो लिखने के खातिर घर मैं भेजा जाऊँगा
चाहे निलंबित कर दो या सेवा से मुक्त करो मुझको
मैं कवि हूँ दो टुक कहता हूँ फिर भी कविता गाऊँगा
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2 comments:

  1. वाह ,,, मजा आ गया पाठक जी
    जबरदस्त

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मुक्तक

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