अभिनंदन है आप सबों का
मेरे मन के आँगन पर
तरस नहीं खाना पाठकगण
मेरे इस विरहापन पर
विरहपूर्ण हैं राहें मेरी
मंजिल है बस सूनापन
हे पाठकगण आप सबों का
स्वागत करता मेरा मन ...
.
- जयशंकर पाठक
मेरे मन के आँगन पर
तरस नहीं खाना पाठकगण
मेरे इस विरहापन पर
विरहपूर्ण हैं राहें मेरी
मंजिल है बस सूनापन
हे पाठकगण आप सबों का
स्वागत करता मेरा मन ...
.
- जयशंकर पाठक
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