तेरे आते ही सपनों में ये साँसें डोल जाती हैं
तसव्वुर के तहों में भी हक़ीक़त घोल जाती है
मेरी ख़ामोश आँखों में हज़ारों राज़ ऐसे हैं
के लब चुप भी रहें लेकिन ये पलकें खोल जाती हैं
.
- जयशंकर पाठक
(मेरा मन)
तसव्वुर के तहों में भी हक़ीक़त घोल जाती है
मेरी ख़ामोश आँखों में हज़ारों राज़ ऐसे हैं
के लब चुप भी रहें लेकिन ये पलकें खोल जाती हैं
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- जयशंकर पाठक
(मेरा मन)
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