Sunday, 10 September 2017

मेरा मन

तेरे आते ही सपनों में ये साँसें डोल जाती हैं
तसव्वुर के तहों में भी हक़ीक़त घोल जाती है
मेरी ख़ामोश आँखों में हज़ारों राज़ ऐसे हैं
के लब चुप भी रहें लेकिन ये पलकें खोल जाती हैं
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 - जयशंकर पाठक
(मेरा मन)

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